शह का ग़म फ़र्शे अज़ा ज़ैनब का था ज़ैनब का है
हश्र तक ये सिलसिला ज़ैनब का था ज़ैनब का है
बाप की ज़ीनत है और मक़सद ए शह की अमीन
मर्तबा ये बा खुदा ज़ैनब का था ज़ैनब का है
काम जिसने ले लिया शमशीर का तक़रीर से
क़ैद में वो हौसला ज़ैनब का था ज़ैनब का है
मुफ्तिए बिदअत तेरे फतवों ने ज़ाहिर कर दिया
खौफ तारी ज़ुल्म पा ज़ैनब का था ज़ैनब का है
हक़ परस्ती, शह का मक़सद, कर्बला से खुल्द तक
इस सफर का रास्ता ज़ैनब का था ज़ैनब का है
मदह खानी शह का मातम जज़्बा ए नुसरत ज़ुहैर
जो करम तुझ पर हुआ ज़ैनब का था ज़ैनब का है