ज़ालिम ए वक़्त किस ख़याल में है
ज़ुल्म तो खुद बा खुद ज़वाल में है
आने वाला है दौर हैदर का
शैख़ अब तक इसी मलाल में है
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चाँद-सूरज में नूर किसका है
किसका जल्वा हर इक जमाल में है
हुस्न ए यूसुफ ये देखता होगा
कौनसा हुस्न शह के लाल में है
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उसकी हिम्मत का हाल क्या कहिए
भागना जिसकी हर मिसाल में है
एक बुढ्ढे का ग़ार में रोना
पूरा क़िस्सा इसी मिसाल में है
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जितने आये थे सब हैं सकते में
शेरे नर है जो बस जलाल में है
एक खत ही तो पार करना है
इतनी हिम्मत किसी के लाल में है