Zad par sitam ki aaj bhi Iran hai Maula

हर एक समत जंग का सामान है मौला
ज़द पर सितम की आज भी ईरान है मौला

नस्ले यज़ीद फिर से पए जंग आयी है
सर ना झुकेगा अपना ये ऐलान है मौला

क़ुर्बान कर चुके हैं ये पालों को गोद के
महका था जो मिनाब बियाबान है मौला

घर दे दिया ज़र दे दिया औलाद भी दे दी
आँखों में अभी खून है तूफान है मौला

हमने सितम की आँखों में वो खौफ भर दिया
खस्ता है हाल बे सरो सामान है मौला

Hoton pa mere shahe khurasan ki sana hai

ये जश्न ए रज़ा जश्न ए रज़ा जश्न ए रज़ा है
इस जश्न में हर लम्हा इबादत का मज़ा है

लगता है मुझे हक़ में मेरे माँ की दुआ है
होटों पे मेरे शाहे खुरासां की सना है

बैअत का तलबगार हुआ फिर से ज़माना
ईरान भी इंकार ए हुसैनी पे डटा है

सेहरा हो तराई हो हवा हो के ज़मी हो
ईरान की हैबत का असर बोल रहा है

क्या हादसे दुनिया के डराएंगे ज़ुहैर अब
बाज़ू पा मेरे मौला का तावीज़ बंधा है

Sadaat ki jo bat ho har baat se phele

सादात की जो बात हो हर बात से पहले
तहज़ीब नज़र आए खयालात से पहले

तहज़ीब की ये बात भी आक़ा ने सिखाई
माँ बाप की खिदमत हो इबादात से पहले

ग़ाज़ी ने तो मैदान मैं खत खेंच दिया था
ज़ैनब ने संभाला है क़यामात से पहले

ग़ाज़ी के क़दम चूम के बस झूम रहा है
दरिया जो लरज़ता था मुलाक़ात से पहले

आया जो फलक तक ये कहीं, ताबा क़यामत
असगर का लहु आएगा बरसात से पहले

मैं सानिए ज़ेहरा हूँ मैं हैदर की दुलारी
दरबार उलट दूँगी मैं ख़ुत्बात से पहले

क्या काम अंधेरों का ज़ुहैर अपनी लहद में
मौला मेरे आएंगे सवालात से पहले

Allah too Iran ki himmat ko badha de

अल्लाह तू ईरान की हिम्मत को बढ़ा दे
ईरान के हाथों ये बड़ा काम करा दे
तागूते ज़माना को ज़माने से मिटा दे
अल्लाह तू ईरान की हिम्मत को बढ़ा दे

देखे ना थे दुनिया ने कभी ऐसे मनाज़िर
सर अपना हथेली पा लिए दीन की खातिर
आज़िम है के ज़ालिम को ही दुनिया से मिटा दे
अल्लाह तू ईरान की हिम्मत को बढ़ा दे

रहबर की शहादत हुई हिम्मत नहीं हारी
ज़ख़्मी जो क़यादत हुई हिम्मत नहीं हारी
हर ज़ख्म को ईरान के अब फूल बना दे
अल्लाह तू ईरान की हिम्मत को बढ़ा दे

बे जुर्मो खता मर गए बच्चे जो सितम से
हैं हौसले माँ बाप के जो तेरे करम से
इस सब्र का इस अज़्म का अब कुछ तो सिला दे
अल्लाह तू ईरान की हिम्मत को बढ़ा दे

भटकी हुई इस क़ौम को अब कौन बताए
सेहरा में नज़र आते हैं मसनूई से साए
जो ज़ुल्म के हामी हैं उन्हें जड़ से मिटा दे
अल्लाह तू ईरान की हिम्मत को बढ़ा दे

जो हौसला लेते हैं सदा करबो बला से
लाचार नहीं होते हवादिस की हवा से
ये मौक़ा मुनासिब है तू परदे को उठा दे
अल्लाह तू ईरान की हिम्मत को बढ़ा दे

Saja Mohsin ke Ghar Muslim Ka Sehra

सजा मोहसिन के घर मुस्लिम का सेहरा
महक देने लगा मुस्लिम का सेहरा

दुआएं हो गई शादाब पूरी
असर ले कर खिला मुस्लिम का सेहरा

रिफत लेने को मुस्लिम जा रहे हैं
जिया देने लगा मुस्लिम का सेहरा

पिसर दोनों तक़ी के गानिया की
अदाओं में सजा मुस्लिम का सेहरा

सजे असग़र तो हादी पूछते हैं
तुम्हें कैसा लगा मुस्लिम का सेहरा

बाराती हैं नक़ी इमरान ओ असग़र
संभाले मुर्तज़ा मुस्लिम का सेहरा

बड़ी जान आज तो समधन बनी हैं
लगी गाने फुआ मुस्लिम का सेहरा

दुआ देती है छोटी जान तेरी
यूँ ही महके सदा मुस्लिम का सेहरा

ज़रा देखो अलीका की उदासी
फ़क़त देखा गया मुस्लिम का सेहरा

Ali Ke Lal ka Qabza hai Ab Bhi Paani Par

जिन्हें यक़ीन है एक रोज़ आने वाले हैं
वो कान धरते नहीं हैं किसी कहानी पर

तुम्हारी जंग ने ईरान ये दिखाया है
अली के लाल का क़ब्ज़ा है अब भी पानी पर

Sila Madh-e-Hasan Ka Paa Rahe Hain

यक़ी जिनको नहीं वो आ रहे हैं
वो ही तो क़ोम को भटका रहे हैं

अज़ानों और अक़ामत पर भी झगडे
तमाशा कोम का बनवा रहे हैं

फ़क़त भूके हैं और प्यासे हैं दिन भर
ये रोज़े क्या हमें सिखला रहे हैं

अना को छोड़ दें आओ सभी हम
हसन भी तो ये ही समझा रहे हैं

सजा है जश्न सिब्ते मुस्तफा का
अली ओ फातिमा खुद आ रहे हैं

मोहम्मद को जो अब्तर कह रहे थे
हसन को देख कर घबरा रहे हैं

ये फन देखो ज़रा सुल्ह ए हसन का
क़लम से सर उड़ाए जा रहे हैं

शऊर ओ अज़्म में इल्मो अमल में
अली वाले सदा आला रहे हैं

हमारे हौसले दुनिया से पूछो
अकेले हो के भी हड़का रहे हैं

यक़ीनी मौत फिर टूटेगी सर पर
अभी तो बस तुम्हें समझा रहे हैं

Bhala kyun deed se tarsa rahe hain

ज़माने पर वो ही तो छा रहे हैं
जो सो कर मर्ज़ी ए रब पा रहे हैं

मलक उनके ही दर पर आ रहे हैं
लिबास ए खुल्द जो मँगवा रहे हैं

जिन्होंने दर जलाया फातिमा का
भला अब वो भी जन्नत जा रहे हैं

बशारत खुल्द की मिलती है ऐसे
लो देखो हुर को वो अपना रहे हैं

जो राहे हक़ में सर कटवा रहे हैं
वो ही नेज़े पा चलकर आ रहे हैं

मुक़द्दर अपना वो चमका रहे हैं
नजफ़ से कर्बला जो जा रहे हैं

अक़ीदत में कमी है कुछ हमारी
यूँ ही वो दीद से तरसा रहे हैं

Qalam Hasan ne Uthaya hai Karbala ke liyen

ज़मीं पा आया है जो दीन की बक़ा के लिए
जबीं को सजदे में रख्खेगा बस खुदा के लिए

लिखी है सुल्ह फ़क़त या सिफारिश ए क़ासिम
क़लम हसन ने उठाया है कर्बला के लिए

Madar-e-Fatima Khadija Hain

क्या कहूं तुमसे क्या खदीजा हैं
नूर-ए-राह-ए-हुदा खदीजा हैं

हम सर ए मुस्तफा खदीजा हैं
मादर ए फातिमा खदीजा हैं

दीन मोहसिन है मोमिनो सच है
दीन की मोह सिना खदीजा हैं

मालो दौलत लुटाई है दीं पर
अस्ल-ए-ख़ैर-ओ-अता ख़दीजा हैं

माल ही क्या, थी जान भी हाज़िर
अज़्म की इंतिहा ख़दीजा हैं

थी जो मूनिस नबी की हर लम्हा
नूर ए सब्र ओ रज़ा खदीजा हैं

इंतिहा ये ज़ुहैर अज़मत की
पहली जो मोमिना, खदीजा हैं