Hashr tak royega tumko ye zamana Abbas a.s.

क़त्ल शब्बीर हुए, अहले हराम क़ैद हुए
एक रस्सी में ही जब बांधे गए सबके गले
बे कजावा सरे बाज़ार जो ऊंटों पा लिए
सर भी नेज़ों प् शहीदों के उठा वो चले
इस क़दर ग़म थे के ज़ैनब से भी रोका ना गया
फट गया ग़म से जिगर रो के ये ज़ैनब ने कहा

बादे आशूर था ज़ैनब का ये नौहा अब्बास
तेरे ही दम से था बाक़ी मेरा परदा अब्बास

कर्बला हमको ज़रा रास ना आई भाई
लुट गई ज़ैनब ए नाशाद दुहाई भाई
छिन गया हाए मेरा मुझसे सहारा अब्बास
बादे आशूर था ज़ैनब का ये नौहा अब्बास

तेरे जाने से क़यामत पे क़यामत आई
मैं हूँ पाबंद ए रसन और सिना पर भाई
किस तरह तुमको भला है ये गवारा अब्बास
बादे आशूर था ज़ैनब का ये नौहा अब्बास

मेरी चादर भी गई, और सरो सामान लुटा
कट गए हाथ तेरे मश्क पे भी तीर लगा
पानी तो आ न सका, ख़ून में डूबा अब्बास
बादे आशूर था ज़ैनब का ये नौहा अब्बास

खौफ आता है मुझे कैसा समाँ है रन में
कुछ नज़र आता नहीं सिर्फ धुआँ है रन में
मैंने हर गाम तेरा नाम पुकारा अब्बास
बादे आशूर था ज़ैनब का ये नौहा अब्बास

किसको आवाज़ दूँ अब, कौन सहारा देगा
कौन शब्बीर के बच्चों को दिलासा देगा
काश इस वक़्त मेरा होता सहारा अब्बास
बादे आशूर था ज़ैनब का ये नौहा अब्बास

तेरे बाज़ू पे भरोसा था मेरे भाई मुझे
साथ बच्चे हैं डराती है ये तन्हाई मुझे
दूर तक भी तो नहीं कोई हमारा अब्बास
बादे आशूर था ज़ैनब का ये नौहा अब्बास

मक़सद ए शह को बचा लाऊँ वो ताक़त दो मुझे
आओ अब शाम के दरबार में हिम्मत दो मुझे
हाय ज़ालिम ने मेरा नाम पुकारा अब्बास
बादे आशूर था ज़ैनब का ये नौहा अब्बास

याद ए शब्बीर है और सीनो में ग़म है तेरा
आज तो ग़ैरों के घर में भी अलम है तेरा
हश्र तक रोयेगा तुमको ये ज़माना अब्बास
बादे आशूर था ज़ैनब का ये नौहा अब्बास

सारी दुनिया को तेरी याद दिलाता है ज़ुहैर
कर्बला क्या है ज़माने को बताता है ज़ुहैर
अश्क आँखों में लिए लिखता है नौहा अब्बास
बादे आशूर था ज़ैनब का ये नौहा अब्बास

Bhai Abbas Bhai Abbas

भाई अब्बास भाई अब्बास
सुन लो फर्याद भाई अब्बास

कौन है अपना सहारा
है यहाँ कौन हमारा
चार सू है फ़क़त हिरास – भाई अब्बास
भाई अब्बास भाई अब्बास

तुम जो दरया को सिधारे
कट गए शाने तुम्हारे
और बच्चे हुए बे आस – भाई अब्बास
भाई अब्बास भाई अब्बास

उसकी आँखों में नमी थी
वो तुम्हें ढूंढ रही थी
जब अलम आया मेरे पास – भाई अब्बास
भाई अब्बास भाई अब्बास

रो के ज़ैनब ये पुकारी
लाड़ली का भी तुम्हारी
खून से तर हुआ लिबास – भाई अब्बास
भाई अब्बास भाई अब्बास

बे रिदा ले गए हमको
बांध कर एक रसन को
तुम नहीं थे जो मेरे पास – भाई अब्बास
भाई अब्बास भाई अब्बास

जब पढ़ा जायेगा मेहदी
नौहा ज़ैनब की ज़बानी
सदा तड़पाएगा एहसास – भाई अब्बास
भाई अब्बास भाई अब्बास

Salwat-o-Salam Aap Pe Ya Fatima Zehra s.a.

सलवातो सलाम आप पे या फातिमा ज़ेहरा
कोहराम है मजलिस में बपा फातिमा ज़ेहरा
हम आये हैं रोने के लियें फातिमा ज़ेहरा

आते थे फ़रिश्ते जहाँ क़ुरआन को लेकर
उस घर को जलाया गया या फातिमा ज़ेहरा
कोहराम है मजलिस में बपा फातिमा ज़ेहरा
हम आये हैं रोने के लियें फातिमा ज़ेहरा

कलमा भी पढ़ा बुग़ज़ों हसद पाल के सब ने
क्या अज्रे रिसालत में दिया फातिमा ज़ेहरा
कोहराम है मजलिस में बपा फातिमा ज़ेहरा
हम आये हैं रोने के लियें फातिमा ज़ेहरा

रोने ना दिया आपको बाबा की लहद पर
उम्मत ने हर एक ज़ुल्म किया फातिमा ज़ेहरा
कोहराम है मजलिस में बपा फातिमा ज़ेहरा
हम आये हैं रोने के लियें फातिमा ज़ेहरा

दरवाज़ा जला क़त्ल हुए बे खता मोहसिन
पहलू भी शकिस्ता हुआ या फातिमा ज़ेहरा
कोहराम है मजलिस में बपा फातिमा ज़ेहरा
हम आये हैं रोने के लियें फातिमा ज़ेहरा

जब मौला को लोगों से छुड़ाने लगी बीबी
बाज़ू पा तेरे वार हुआ फातिमा ज़ेहरा
कोहराम है मजलिस में बपा फातिमा ज़ेहरा
हम आये हैं रोने के लियें फातिमा ज़ेहरा

ए काश मुसीबत को ज़ुहैर आपकी बीबी
नौहा लिखे कर पाए अदा फातिमा ज़ेहरा
कोहराम है मजलिस में बपा फातिमा ज़ेहरा
हम आये हैं रोने के लियें फातिमा ज़ेहरा

Besheer Kahan Hai Mera Besheer Kahan Hai

बेशीर कहाँ है मेरा बेशीर कहाँ है
किस जा तुझे ढूंढेगी परेशान ये माँ है
बेशीर कहाँ है मेरा बेशीर कहाँ है

सेहरा है बियाबान है दिल रोता है असगर
सब जंग के सामान हैं पुर हौल समाँ है
बेशीर कहाँ है मेरा बेशीर कहाँ है

सुनती हूं के मैदान में तीरों से लड़ा है
छः माह का बच्चा वो मेरा तश्ना दहाँ है
बेशीर कहाँ है मेरा बेशीर कहाँ है

क्या लाल मेरे भाई से मिलने को गए हो
हमशक्ल ए पयंबर के भी सीने में सिना है
बेशीर कहाँ है मेरा बेशीर कहाँ है

खेमों को जलाया तेरा झूला भी जलाया
दिखता नहीं कुछ भी मेरी आँखों में धुआँ है
बेशीर कहाँ है मेरा बेशीर कहाँ है

ता हश्र सदा साथ रहेगी ये आलम के
इस मश्क ए सकीना में अलमदार की जाँ है
बेशीर कहाँ है मेरा बेशीर कहाँ है

पानी लिए कूज़े में बहन ढूंढ रही है
खुद प्यासी है कहती है मेरा भाई कहाँ है
बेशीर कहाँ है मेरा बेशीर कहाँ है

रोते हैं शब्बो रोज़ परिंदे तुम्हें असग़र
ये गिरया कुनाँ ग़म में तेरे इनकी ज़बाँ है
बेशीर कहाँ है मेरा बेशीर कहाँ है

एक माँ की मुसीबत को बयान कैसे करे हम
सैलाब सा हर फ़र्द की आँखों से रवाँ है
बेशीर कहाँ है मेरा बेशीर कहाँ है

कुछ डर नहीं मरक़द के अँधेरों का ज़ुहैर अब
रौशन मेरे सीने पे जो मातम का निशाँ है
बेशीर कहाँ है मेरा बेशीर कहाँ है

Sughra ne likha khat mian ke kab aaoge Akbar

सुग़रा ने लिखा खत में कि कब आओगे अकबर
कह कर ये गए थे मुझे ले जाओगे अकबर

मसरूफे सफर हो मुझे एहसास है भाई
आओगे मुझे लेने ये ही आस है भाई
कब आओगे कब आओगे कब आओगे अकबर
सुग़रा ने लिखा खत में कि कब आओगे अकबर

बाबा कभी अम्मू कभी याद आई सकीना
तुम जबसे गए हो गया वीरान मदीना
क्या आ के मदीने मुझे ले जाओगे अकबर
सुग़रा ने लिखा खत में कि कब आओगे अकबर

एक पल के लिए भी मेरा दिल ही नहीं लगता
फुरक़त में तुम्हारी यूँ ही मर जाऊँगी तनहा
बीमार हूँ कितना मुझे रुलवाओगे अकबर
सुग़रा ने लिखा खत में कि कब आओगे अकबर

सब साथ में होंगे मुझे राहत ही मिलेगी
बहना ये तुम्हारी कोई शिकवा ना करेगी
तुम मेरे लिए बाबा को समझाओगे अकबर
सुग़रा ने लिखा खत में कि कब आओगे अकबर

आँखें हैं लगी राह पे दिल रोता है मेरा
सोती नहीं रातों को ना दिन कटता है मेरा
वो हाल है तुम देख के घबराओगे अकबर
सुग़रा ने लिखा खत में कि कब आओगे अकबर

रोती थी तड़पती थी परेशान थी सुग़रा
आँखों में ज़ुहैर आँसू लिए कहती थी दुखिया
लगता है मैं मर जाऊँगी तब आओगे अकबर
सुग़रा ने लिखा खत में कि कब आओगे अकबर
कह कर ये गए थे मुझे ले जाओगे अकबर

Sabka Paidal Najaf Se Safar Hai

اربعین شہ انبیا ہے – سب کا پیدل نجف سے سفر ہے
ہم کو غازی نے موقہ دیا ہے – سب کا پیدل نجف سے سفر ہے

جس طرف بھی نظر جا رہی ہے – ساری خلقے خدا رو رہی ہے
سر پے غازی کا پرچم کھلا ہے – سب کا پیدل نجف سے سفر ہے

ساتھ بوڑھوں کے دیکھو جواں ہیں – ماؤں کے ساتھ میں بیٹیاں ہیں
کم سنوں کا بلند حوصلہ ہے – سب کا پیدل نجف سے سفر ہے

نید آنکھوں سے سب کی اڈی ہے -اب تو بس کربلا کی پڑی ہے
لب پہ بس کربلا کربلا ہے – سب کا پیدل نجف سے سفر ہے

سوچ کر آنکھیں تر ہو رہی ہیں – ساتھ میں سیدہ چل رہی ہیں
ہاے پیاسوں کا ماتم بپا ہے -سب کا پیدل نجف سے سفر ہے

ہاے پیاسوں نے پانی نہ پایا – گھر کو بشیر واپس نا آیا
ہر عزادار محو بکا ہے – سب کا پیدل نجف سے سفر ہے

شہ کی دختر کا دامن جلایا – خون کانو سے اسکے بہایا
دل غموں سے پھٹا جا رہا ہے – سب کا پیدل نجف سے سفر ہے

اس سفر کی کہانی نا پوچھو – تم بھی جاؤ زبانی نا پوچھو
اے ظہیر اب یہ ہی بس دعا ہے – سب کا پیدل نجف سے سفر ہے

Lo Sham Chali Main Baba Shano Me Rasan Bandhva Ke

لو شام چلی میں بابا شانوں میں رسن بندھوا کے
بے گورو کف تھا بھائی میں آ نا سکی دفنا کے

اب خاک پہ سب سوتے ہیں میرا اکبر میرا غازی – میرا اکبر میرا غازی
اسباب بھی سب لوٹا ہے چادر بھی سر سے اتاری – چادر بھی سر سے اتاری
خیموں میں آگ لگی جب تھا کون بچاتا آکے
لو شام چلی میں بابا شانوں میں رسن بندھوا کے

ٹکڑے ٹکڑے ہے بابا لاشہ بھی ابن حسن کا – لاشہ بھی ابن حسن کا
ہے نظر خزاں اے بابا ہر پھول تمہارے چمن کا -ہر پھول تماہرے چمن کا
امما کی ساری کمائی سب جاتی ہوں میں لوٹا کے
لو شام چلی میں بابا شانوں میں رسن بندھوا کے

بے پردہ لئے جاتے ہیں رسسی میں جکڈ کر ہم کو
اس طرح بندھے ہیں بازو مجبور ہوئی ماتم کو
مر جاؤں کہیں نہ بابا صدموں پے صدمے اٹھا کے
لو شام چلی میں بابا شانوں میں رسن بندھوا کے

محمل نہ عماری کوئی بے پردہ اہلے حرم ہیں
اتٹھارہ ہوں جسکے بھائی اس پر یہ سارے ستم ہیں
کیوں روٹھ گیا میرا غازی تم لاؤ اسکو مانا کے
لو شام چلی میں بابا شانوں میں رسن بندھوا کے

تا حشر رہے گاماتم اب تشنہ لبوں کا گھر گھر
بے کفن تھا ہر ایک لاشہ ہر بی بی تھی بے چادر
رویے گی ساری خدائ ہر ظلم پے اشک بہا کے
لو شام چلی میں بابا شنو میں رسن بندھوا کے

پردرد بیانی نوحہ مہدی نے پڑھا جو بابا
گریہ تھا آھو فگاں تھی ہر قلب کا وعالم تھا
سب اہلے عزا نے ماتم اس درجہ کیا ہے آ کے
لو شام چلی میں بابا شنو میں رسن بندھوا کے

Aye Shaheedane Karbo Bala Alvida Alvida Alvida

اے شہیدان کربوبالا الودا الودا الودا
پرثا دیتے ہیں اہلے عزا الودا الودا الودا

کیوں اداسی سی چّھانے لگی
گھر کی رونق بھی جانے لگی
ہے فضاؤں میں یہ مرثیہ الودا الودا الودا
پرثا دیتے ہیں اہلے عزا الودا الودا الودا

ہاے جی بھر کے رو نہ سکے
کیوں نہ روتے ہوئے مر گئے
اٹھ گیا ہاے فرش عزا الودا الودا الودا
پرثا دیتے ہیں اہلے عزا الودا الودا الودا

سال بھر کے لیں رہ گئے
اپنے سینوں میں حصرت لئے
پھر سے آےنگی گھر سیدہ الودا الودا الودا
پرثا دیتے ہیں اہلے عزا الودا الودا الودا

بھول سکتے نہیں شہ کا غم
ہاتھ سینوں پے آنکھیں ہیں نم
ہاے کیسے کہیں ہم بھلا الودا الودا الودا
پرثا دیتے ہیں اہلے عزا الودا الودا الودا

چھ مہینے کے اصغر کا غم
شہ کی دختر پا ظلم ستم
کیسے مدار نے دیکھا کیا الودا الودا الودا
پرثا دیتے ہیں اہلے عزا الودا الودا الودا

لٹ گیا سیدہ کا چمن
اکبر و قاسم گل بدن
دونو زینب کے ماہے لقا الودا الودا الودا
پرثا دیتے ہیں اہلے عزا الودا الودا الودا

سارے انصار مارے گئے
عصر عاشور تنہا رہے
تشنہ لیب وارث امبیا الودا الودا الودا
پرثا دیتے ہیں اہلے عزا الودا الودا الودا

شھ کی خدمات میں آنسوں لئے
یہ عزادار روتے ہوئے
پرسا دیتے ہیں عبّاس کا الودا الودا الودا
پرثا دیتے ہیں اہلے عزا الودا الودا الودا

زینب خستہ تن الودا
ایک شب کی دلہن الودا
اے اسیران کربوبالا الودا الودا الودا
پرثا دیتے ہیں اہلے عزا الودا الودا الودا

اے ظہیر اس طرح غم کرو
آج جی بھر کے ماتم کرو
پھر یہ موقع ملا نہ ملا الودا الودا الودا
پرثا دیتے ہیں اہلے عزا الودا الودا الودا


 

دل میں غازی کے حصرت رہی
مشک تیروں سے چھلنی ہوئی
رن سے آقا کو دی یہ صدا الودا الودا الودا
پرثا دیتے ہیں اہلے عزا الودا الودا الودا

بے کفن رن میں لاش رہے
ماں پھپی بہنوں کے سر کھلے
ایک بیمار کہتا رہا الودا الودا الودا
پرثا دیتے ہیں اہلے عزا الودا الودا الودا

Noha Salam Farmandeh

Ya Maulana Ya Sahibuz Zaman
Al Gaus Al Gaus Al Gaus
Adrikni Adrikni Adrikni

Aye Maula – Imam-e-Zamanam
Aye Aaqa – Imam-e-Zamanam
Aye Pursedar – Imam-e-Zamanam
Aye Sogavar…
Aqa Azaye Husain Humne Bichayi hai…
Purse ko Dadi Teri Tashreef Layi hain…
Khoon rote aye matamdar….

Salam Farmande – Farmande
Aye Khon roone wale
Salam Farmande – Farmande
Tumko karbala ka hum wasta deta hain…
Salam Farmande – Farmande

Zahra ke Marqad ko… Moshin ke purse ko…
Kanon ke Bunon ko… Zainab ke parde ko…
Ghazi ke Shano ko… Qasim ke sehere ko…
Aazane Akbar ko… Sughra ke name ko…
Samsin ke purse ko maula mere…
Hazir Azadar hain……

Salam Farmande – Farmande
Aye Khon roone wale
Salam Farmande – Farmande
Tumko karbala ka hum wasta deta hain…
Salam Farmande – Farmande

Hum nanne par zakir hain…
Maula Hum Apni Fida Jaan karenge..
Hum nanne par zakir hain…
Guzri jo pyason pa ailan kareneg..
Hum nanne par zakir hain…
Asghar ke pani ka samaan karenge..
Hum nanne par zakir hain…
Ghar apne hum bibi ko mehmaan karenge..
Hum nanne par zakir hain…
Zalim ko hiladenege maatam is aan karenge……

Salam Farmande – Farmande
Aye Khon roone wale
Salam Farmande – Farmande
Tumko karbala ka hum wasta deta hain…
Salam Farmande – Farmande

Auno Akbar main banun.. Misle Qasim mian banu…
Meri Ma ne hai kaha.. tra khadim main banun…
Tere qadmon pe sada.. sar jhuka kar main rahun…
Tera naukar main banu.. ik sipahi main banun…
Tere lashkar main rahun.. Aur hukoomat main rahun…
Naare dozaq se bachun.. Noore rehmat main rahun…
Teri nusrat ke liyen jaan hateli pa rakhun…
Maqsade Karbo bala main sada yaad rakhun……

Salam Farmande – Farmande
Aye Khon roone wale
Salam Farmande – Farmande
Tumko karbala ka hum wasta deta hain…
Salam Farmande – Farmande


یا مولانا یا سہیبض زمان
ال غوث ال غوث ال غوث
ادرکنی ادرکنی ادرکنی

اے مولا امام زمنم
اے آقا امام زمنم
اے پرسیدار امام زمنم
اے سوگوار
آقا عزا حسین ہمنے بچھائی ہے
پرسے کو دادی تیری تشریف لآیی ہے
خوں روتے اے ماتم دار

سلام فرمندے – فرمندے
اے خوں رونے والے
سلام فرمندے – فرمندے
تمکو کربلا کا ہم واسطہ دیتے ہیں
سلام فرمندے – فرمندے

زہرا کی مرقد کو موحسن کے پرسے کو
کانوں کے بوندوں کو زینب کے پردے کو
غازی کے شانوں کو قسم کے سہرے کو
آزانے اکبر کو صغرا کے نامے کو
کم سن کے پرسے کو مولا میرے
حاضر عزادار ہیں

سلام فرمندے – فرمندے
اے خوں رونے والے
سلام فرمندے – فرمندے
تمکو کربلا کا ہم واسطہ دیتے ہیں
سلام فرمندے – فرمندے

ہم نننے ہیں مگر ذاکر ہیں
مولا ہم اپنی فدا جان کرینگے
ہم نننے ہیں مگر ذاکر ہیں
جو گزری ہے پیسوں پر اعلان کرینگے
ہم نننے ہیں مگر ذاکر ہیں
اصغر کے لئیں پانی کا سامان کرینگے
ہم نننے ہیں مگر ذاکر ہیں
گھر اپنے ہم بی بی کو مہمان کرینگے
ہم نننے ہیں مگر ذاکر ہیں
ظالم کو ہلا دینگیں ماتم اس آن کرینگے

سلام فرمندے – فرمندے
اے خوں رونے والے
سلام فرمندے – فرمندے
تمکو کربلا کا ہم واسطہ دیتے ہیں
سلام فرمندے – فرمندے

اونو اکبر میں بنوں مسلے قاسم میں بنوں
میری ماں نے ہے کہا تیرا خادم میں بنوں
تیرے قدموں میں صدا سر جھکا کر میں رہوں
تیرا نوکر میں بنوں ایک سپاہی میں بنوں
تیرے لشکر میں رہوں اور حکومت میں رہوں
نار دوزاق سے بچوں نور رحمت میں رہوں
تیری نصرت کے لیں جاں ہتیلی پا رکھوں
مقسدے کربو بلا میں صدا یاد رکھوں

سلام فرمندے – فرمندے
اے خوں رونے والے
سلام فرمندے – فرمندے
تمکو کربلا کا ہم واسطہ دیتے ہیں
سلام فرمندے – فرمندے

Ghamon par Gham Uthaye Ja rahe hain…

غموں پر غم اٹھاے جا رہے ہیں
ہمیں ظالم ستاے جا رہے ہیں

بہت بے چین ہے نننی سی بچچی
تماچے کیوں لگاے جا رہے ہیں

کہاں ہو اے میرے عممو بچاؤ
پھوپی کو بھی رلاے جا رہے ہیں

لگی ہے آگ دامن میں بھی میرے
سبھی خیمیں جلاے جا رہے ہیں

میرے کانو سے خون بہنے لگا ہے
میرے گوہر اتارے جا رہے ہیں

مجھے اس اونٹ پر باندھا گیا ہے
جسے ظالم چلاے جا رہے ہیں

سکینہ آج بھی پیاسی ہے عممو
شخی پانی بہاے جا رہے ہیں

ظہیر غمزدہ کیسے لکھوگے
ستم جو ہم پا ڈھاے جا رہے ہیں