Baqir Jahan Main Aaye to Elaan Ho Gaya

इमरान तेरा जिसको भी इरफ़ान हो गया
वो आदमी हक़ीक़ी मुसलमान हो गया

ये शान भी तो आपके घर को मिली फ़क़त
हर एक बच्चा बोलता क़ुरआन हो गया

दर पाँचवा खुला है इमामत का दोस्तों
बाक़िर जहाँ में आए तो ऐलान हो गया

सज्जाद का ये फ़ैज़ है बाक़िर की शक्ल में
इनका भी इल्म दीन की पहचान हो गया

कब बोलना है, कितना, कहाँ और किस लिए
तब्लीग-ए-हक़ जहान में आसान हो गया

हर्फ़-ओ-बयाँ को नूर मिला फ़िक्र को ज़िया
उल्फत का आगही का भी सामान हो गया

मक़तब खुला तो ज़ुल्म का साया सिमट गया
रौशन हर एक दीन का अरकान हो गया

मैंने ज़ुहैर मदह ओ सना में लिखा जो सब
जब जब पढ़ा है खुद भी मैं हैरान हो गया