Midhat Ali Asghar ki Bas Meri Zaba.an Par Ho

ये ज़िक्र रहे क़ायम जब जब भी जहाँ पर हो
अब जल्द वो मुसल्ला भी आबे रवाँ पर हो

जब पर्दा उठे या रब, और महदी नुमायाँ हों
मिदहत अली असग़र की बस मेरी ज़बाँ पर हो


पैदाइश ए असग़र का मक़सद ही शहादत है
फिर क्यों ना तेरी हैबत ही तीरो कमाँ पर हो

ख़ामोश लबों में भी जब इतना असर है तो
मिदहत अली असग़र की बस मेरी ज़बाँ पर हो

Khadi Ho Kandhe Se Kandha Milaye Zainab Se

बक़ाए मक़सद ए शब्बीर में रहीं शामिल
तुम्हारे लफ्ज़ भी आगे ना आए ज़ैनब से

फ़ज़ीलतों में फ़ज़ीलत जुदा ये है कुलसूम
खड़ी हो काँधे से काँधा मिलाए ज़ैनब से

Zikr e Haider ko aam karte hain

हम जो ज़िक्रे इमाम करते हैं
क़द से ऊँचा ये काम करते हैं

ज़िकरे मौला का फैज़ तो देखो
सिन रसीदा सलाम करते हैं

——————————————————————-

क़द से ऊँचा वो काम करते हैं
जो भी ज़िक्रे इमाम करते हैं

उनका सब एहतिराम करते हैं
जो सिना से कलाम करते हैं

दार पर जा के मीसमे तम्मार
ज़िक्रे हैदर को आम करते हैं

आने वाले हैं ग़ैब से मौला
क्या कोई इंतज़ाम करते हैं

मर्सिया नोहा मन्क़बत खानी
आम शह का पयाम करते हैं

नारा हैदर का हम लगा के ज़ुहैर
रुख़ पे मुनकिर के शाम करते हैं

Labon pe Apne Sajaya hai naam Baqir ka

लबों पे अपने सजाया है नाम बाक़िर का
है मुझको नाज़ के मैं हूँ ग़ुलाम बाक़िर का

इमाम पांचवे है कर्बला के क़ैदी भी
ज़माना इस लिए भी है ग़ुलाम बाक़िर का

Husla Haider e Karrar se lekar Iran

حوصلہ حیدر کررار سے لے کر ایران
کیا بھلا وار وو اس پار نہیں کر سکتا

جیتنا جنگ تیرے بس میں نہیں ہے ظالم
تو تو ایک وار بھی بیکار نہیں کر سکتا