हुर की तरह नसीब को अपने जगा लिया
जिसने दरे हुसैन पा सर को झुका लिया
हमने जो शह का फ़र्शे मसर्रत बिछा लिया
हर एक यज़ीद ज़ादे ने मुँह को छुपा लिया
बे रोक टोक सीधा जहन्नम में जायेगा
जो रास्ता हुसैन से हट कर बना लिया
आग़ोश ए फातिमा में हैं शब्बीर इस तरह
इस्मत ने जैसे गोद में क़ुरआन उठा लिया
फितरुस को बालो पर भी मिले ज़िन्दगी मिली
झूले से उसने ख़ुद को ज़रा-सा मिला लिया
ज़ालिम की पूरी फ़ौज ही सकते में आ गयी
रन में ज़रा सग़ीर यूँ ही मुस्कुरा लिया
मुस्कान से ही फ़ौज में सब खलबली सी है
क्या होगा गर सग़ीर ने नेज़ा उठा लिया
जाऊं ना में पलट के यही आरज़ू रही
इक बार जिसने रोज़े का दीदार पा लिया
मंज़र जो कर्बला के मयस्सर हुए हमें
नज़रों के रास्ते उन्हें दिल में बसा लिया
नज़रों से अपनी रोका था लश्कर दिलेर ने
तुमसे हटेंगे खेमें भला सोच क्या लिया
इस पार आ गया तो वो उस पार जायेगा
जिसने भी एक क़दम मेरे खत से बढ़ा लिया
हम पर ज़ुहैर फातिमा ज़ेहरा की है अता
हमने तो अपना अश्क भी मोती बना लिया