Sadaat ki jo bat ho har baat se phele

सादात की जो बात हो हर बात से पहले
तहज़ीब नज़र आए खयालात से पहले

तहज़ीब की ये बात भी आक़ा ने सिखाई
माँ बाप की खिदमत हो इबादात से पहले

ग़ाज़ी ने तो मैदान मैं खत खेंच दिया था
ज़ैनब ने संभाला है क़यामात से पहले

ग़ाज़ी के क़दम चूम के बस झूम रहा है
दरिया जो लरज़ता था मुलाक़ात से पहले

आया जो फलक तक ये कहीं, ताबा क़यामत
असगर का लहु आएगा बरसात से पहले

मैं सानिए ज़ेहरा हूँ मैं हैदर की दुलारी
दरबार उलट दूँगी मैं ख़ुत्बात से पहले

क्या काम अंधेरों का ज़ुहैर अपनी लहद में
मौला मेरे आएंगे सवालात से पहले