तेरा रजब को काबे से ऐलान हो गया
पैदा जहाँ में काबे का सुलतान हो गया
था इस क़दर अली की मोहब्बत में संग ए बैत
मिस्ले गुलाब खिल के गुलिस्तान हो गया
जो दर बना था काबे में अब तक छुपा नहीं
जब भी छुपाया जिसने परेशान हो गया
हैरत में अक़्ल सजदे में तारीख़ झुक गयी
दस्ते नबी में बोलता क़ुरआन हो गया
जूं ही अली ने झूले में अजदर को दो किया
नाकाम एक लम्हे में शैतान हो गया
किसका लहू नजिस है भला किसका पाक तर
नारा अली का नस्ल की पहचान हो गया
नाते नबी के बाद सना ए अली हुई
मैं क्या कहूं कि हक़ का ये ऐलान हो गया
मौला कहा है मौला अली को नबी ने खुद
बखखिन कहा था खुद ही तू अनजान हो गया
हर एक अपनी क़ब्र में सर फोड़ने लगा
जो भी यहाँ ग़दीर से अंजान हो गया
तेरा रजब को काबे का सम्मान हो गया
आए अली तो काबे का उथ्थान होगया
था इस क़दर अली की मोहब्बत में संग ए बैत
मिस्ले गुलाब काबे का पाशान हो गया
जो दर बना था काबे में अब तक छुपा नहीं
जितना गणित लगा लिया विज्ञान हो गया
जूं ही अली ने झूले में अजदर को दो किया
नाकाम सारा कुफ्र का अभियान हो गया
हैरत में अक़्ल सजदे में तारीख़ झुक गयी
दो दिन का एक सग़ीर जो बलवान हो गया
नाते नबी के बाद सना ए अली हुई
हर लफ्ज़ शेख जी के लिए बान हो गया
किसका लहू नजिस है भला किसका पाक तर
नारे से एक सारा अनूमान हो गया
मौला कहा नबी ने तो ईमान खिल उठा
रोज़े ग़दीर सारा समाधान हो गया
हर एक अपनी क़ब्र में सर फोड़ने लगा
जो भी यहाँ ग़दीर से अज्ञान हो गया
जब आयी ये सदा के लहद से उठो ज़ुहैर
मेरा कफ़न ही मेरा परीधान हो गया