दिन-रात की गर्दिश ने बताया के ख़ुदा है
हर साँस ने हर बार जताया के ख़ुदा है
जब बाद ए सहर गाने लगी रब का तराना
चिड़ियों ने चहक कर वो सुनाया के ख़ुदा है
सेहरा ने कभी लू ने तो सूरज की तपिश ने
हर शाम ने एहसास कराया के खुदा है
बे इज़्न ए खुदा हिलते नहीं पेडों के पत्ते
मौसम ने बदल कर ये दिखाया के ख़ुदा है
हर फर्द से हर फर्द जुदा रंग जुदा है
पर एक सी धड़कन ने बताया के खुदा है
हर जिस्म हर इक रूह अमानत है खुदा की
दोनों ने अलग होके दिखाया के खुदा है
झलकी ही सही तूर पे ज़ाहिर तो हुआ था
मूसा ने तजल्ली में ये पाया के खुदा है
ख़ालिक़ को उठाना पड़ा तब अर्श के ऊपर
जब ईसा को कहने लगी दुनिया के खुदा है
आए हैं सवा लाख नबी ये ही बताने
ये प्यारे मोहम्मद ने सिखाया के खुदा है
पैकर से नबी के भी हक़ीक़त ये अयाँ है
बस जिस्म ज़मीं पर है, ना साया के खुदा है
सदियों का सफर लम्हों में कर आए मोहम्मद
मेराज ने अहमद की बताया के खुदा है
लो आमद ए हैदर के लिए खिल गए पत्थर
दीवार ने काबे की दिखाया के खुदा है
काबे में विलादत हुई आते ही अली ने
आग़ोश-ए-मुहम्मद में सुनाया के ख़ुदा है
कहते थे अली बर सरे मिम्बर जो सलूनी
दावा ए सलूनी था ये दावा के खुदा है
रिश्ता लिए ज़ेहरा से अली का वो सितारा
दहलीज़ पे आकर ये पुकारा के खुदा है
आए जो हसन सारा ज़माना हुआ शाहिद
किरदार में उनके नज़र आया के खुदा है
शब्बीर ने तौहीद बचाई है लहू से
सर दे दिया पर सर ना झुकाया के खुदा है
है कोई जो हक़ बात पे सर देने को आए
अकबर ने अज़ाँ देके बुलाया के खुदा है
जब गर्द ए सितम दिल से हटी ज़ेहन पुकारा
हुर छोड़ के बातिल इधर आया के खुदा है
वो सिर्फ चरागों का बुझाना तो नहीं था
सर्वर ने अंधेरों को जगाया के खुदा है
असग़र भी बताने को ये ही आ गए रन में
मुस्कान को होठों पे सजाया के खुदा है
हक़ बात पे सर देना फ़रीज़ा है हमारा
सर सजदे में सर्वर ने झुकाया के खुदा है
मेहदी की ये ग़ैबत भी हकीकत है खुदा की
हर राज़ से उठ जायेगा पर्दा के खुदा है
तौहीद भला कैसे लिखी जाए ज़ुहैर अब
अल्फ़ाज़ ने फिर साथ निभाया के खुदा है