हर एक समत जंग का सामान है मौला
ज़द पर सितम की आज भी ईरान है मौला
नस्ले यज़ीद फिर से पए जंग आयी है
सर ना झुकेगा अपना ये ऐलान है मौला
क़ुर्बान कर चुके हैं ये पालों को गोद के
महका था जो मिनाब बियाबान है मौला
घर दे दिया ज़र दे दिया औलाद भी दे दी
आँखों में अभी खून है तूफान है मौला
हमने सितम की आँखों में वो खौफ भर दिया
खस्ता है हाल बे सरो सामान है मौला