Aye Zaban Panjetan-e-Paak Ki Midhat Karna

खौफ-ए-सूली ना था कुछ दिल में क़ज़ा की हैबत
बोले मीसम के सना मिस्ले इबादत करना

जान जाती है अगर जाए मज़ा आ जाए
ए ज़बां पंजतन-ए-पाक की मिदहत करना