Sar Ko Peeto Momino Ye Kya Qayamat Ho Gayi

सर को पीटो मोमिनों ये क्या क़यामत हो गई
आज बिन्ते मुस्तफा भी सबसे रुख्सत हो गई

ज़ालिमों ने ये ना सोचा है नबी की लाड़ली
ज़ुल्म वो ढाए के बीबी की शहादत हो गई

हक़ भी छीना, घर जलाया, कलमा-गो कैसे थे वो
सय्यदा के वास्ते क्या क्या मुसीबत हो गई

पिस गयी बेटी नबी की जब दर-ओ-दीवार में
आमद-ए-मोहसिन जो थी वो एक हसरत हो गई

साँस लेना भी था मुश्किल पसलियों के दर्द से
ग़म ज़दा बीबी जहाँ से हाए रुखसत हो गई

कह के ये रोए अली जब देखीं टूटी पसलियां
क्या कहूंगा मैं नबी से, क्या अमानत हो गई

सिर्फ अठारह बरस में हो गई बीबी ज़ईफ़
कितनी सदियों के बराबर एक साअत हो गई

क़ब्र में भी चैन से सोने ना पाई सय्यदा
मुन्हदिम बिन्ते नबी की हाए तुर्बत हो गई

बैन करती थी नबी से लाड़ली बेटी ज़ुहैर
आप के जाते ही बाबा एक क़यामत हो गई

Salwat-o-Salam Aap Pe Ya Fatima Zehra s.a.

सलवातो सलाम आप पे या फातिमा ज़ेहरा
कोहराम है मजलिस में बपा फातिमा ज़ेहरा
हम आये हैं रोने के लियें फातिमा ज़ेहरा

आते थे फ़रिश्ते जहाँ क़ुरआन को लेकर
उस घर को जलाया गया या फातिमा ज़ेहरा
कोहराम है मजलिस में बपा फातिमा ज़ेहरा
हम आये हैं रोने के लियें फातिमा ज़ेहरा

कलमा भी पढ़ा बुग़ज़ों हसद पाल के सब ने
क्या अज्रे रिसालत में दिया फातिमा ज़ेहरा
कोहराम है मजलिस में बपा फातिमा ज़ेहरा
हम आये हैं रोने के लियें फातिमा ज़ेहरा

रोने ना दिया आपको बाबा की लहद पर
उम्मत ने हर एक ज़ुल्म किया फातिमा ज़ेहरा
कोहराम है मजलिस में बपा फातिमा ज़ेहरा
हम आये हैं रोने के लियें फातिमा ज़ेहरा

दरवाज़ा जला क़त्ल हुए बे खता मोहसिन
पहलू भी शकिस्ता हुआ या फातिमा ज़ेहरा
कोहराम है मजलिस में बपा फातिमा ज़ेहरा
हम आये हैं रोने के लियें फातिमा ज़ेहरा

जब मौला को लोगों से छुड़ाने लगी बीबी
बाज़ू पा तेरे वार हुआ फातिमा ज़ेहरा
कोहराम है मजलिस में बपा फातिमा ज़ेहरा
हम आये हैं रोने के लियें फातिमा ज़ेहरा

ए काश मुसीबत को ज़ुहैर आपकी बीबी
नौहा लिखे कर पाए अदा फातिमा ज़ेहरा
कोहराम है मजलिस में बपा फातिमा ज़ेहरा
हम आये हैं रोने के लियें फातिमा ज़ेहरा