Midhat Ali Asghar ki Bas Meri Zaba.an Par Ho

ये ज़िक्र रहे क़ायम जब जब भी जहाँ पर हो
अब जल्द वो मुसल्ला भी आबे रवाँ पर हो

जब पर्दा उठे या रब, और महदी नुमायाँ हों
मिदहत अली असग़र की बस मेरी ज़बाँ पर हो


पैदाइश ए असग़र का मक़सद ही शहादत है
फिर क्यों ना तेरी हैबत ही तीरो कमाँ पर हो

ख़ामोश लबों में भी जब इतना असर है तो
मिदहत अली असग़र की बस मेरी ज़बाँ पर हो

Jahan Bhi Zikr-e-Risalat MaAab Hota Hai

वहीं तो फ़ज़्ल-ए-ख़ुदा बे-हिसाब होता है
फ़िज़ा में अम्बर ओ मुश्क ओ गुलाब होता है

फ़रिश्ते आके उसी दर पे फख्र करते हैं
जहाँ भी जिक्रे रिसालत मआब होता है

दरे नबी की ग़ुलामी का ये शरफ़ देखो
मलक भी आके यहीं फ़ैज़याब होता है

नबी के रद्दे अमल से ही सीख ले दुनिया
करो जो सब्र तो फिर इंक़लाब होता है

हैं शहर ए इल्म नबी उसका दर अली मौला
बे इज़्न शहर में जाना खराब होता है

लबों पे नाम नबी का दिलों में बुग़ज़े अली
सवाब सारा का सारा अज़ाब होता है

खुदा के बाद नबी हैं नबी के बाद अली
ये याद रखना हिसाबो किताब होता है

ज़ुहैर नाते नबी है, ये बा वज़ू लिखना
हर एक लफ्ज़ भी इसमें गुलाब होता है

Taqve Ne Inke Dar Se Muqaddar Bana Liya

दर पर तक़ी के जिसने भी सर को झुका लिया
बिगड़ी हुई हयात को उसने बना लिया

फ़ज़्ले खुदा से अपना मुक़द्दर जगा लिया
जशने तक़ी में आके क़सीदा सुना लिया

आमद हुई है मौला तक़ी की जहाँ में आज
यानी इमामतों ने नवें दर को पा लिया

बचपन से ही वक़ारे इमामत की शान है
तक़वे ने इनके दर से मुक़द्दर बना लिया

कम सिन थे जब के इल्म ए इमामत के सामने
बातिल के हर सवाल ने मुँह को छुपा लिया

मुट्ठी जो बंद की थी वो खुलना था खुल गई
बातिल ने खुद को खुद से ही रुसवा करा लिया

हर बार आज़माता था मामून इल्म से
हर बार इल्मे मौला तक़ी ने हरा लिया

दरबार में जो इल्म की बातें अयाँ हुई
बातिल खमोश हो गया सर को झुका लिया

इल्मे खुदा का बहता समंदर इमाम हैं
हमने तो मोती रोल लिए तुमने क्या लिया

बाबुल मुराद भी हैं ये जव्वाद भी यही
मैंने दुआ में नाम ए तक़ी बारहा लिया

अकबर अली में जशने तक़ी रात भर हुआ
इश्क़ ए तक़ी की गर्मी ने सबको समा लिया

तुझ पर ज़ुहैर इनकी अता है ये बा खुदा
मिदहत से इनकी लफ्ज़ को मोती बना लिया

Beti Vo Jisko Umme Abeeha Kaha Gaya

मेराज पर जो ताइर ए फिकरे रसा गया
तब लौहे दिल पे नामे मुहम्मद लिखा गया

कौसर रसूल अर्श अली की विलायतें
यकजा लिखे तो फातिमा ज़ेहरा पढ़ा गया

अल्लाह ने बुला के अता की रसूल को
बेटी वो जिसको उम्मे अबीहा कहा गया

बेटी नबी की एक फ़क़त फातिमा ही थीं
खुलके नबी को बाप का रिश्ता दिया गया

असहाब सारे छत से नज़ारे में गुम रहे
उतरा सितारा रिश्ता दिया और चला गया

गर जानना है कौन भला अहले बैत हैं
ये देखो कौन कौन ही ज़ेरे किसा गया

रोज़ा नमाज़ हज ये मुकम्मल हुए हैं कब
जब हाजियों को रोक के मौला दिया गया

जिसने नबी की बेटी का घर तक जला दिया
सद हैफ़ ये के उसको खलीफा कहा गया

ये मन्क़बत सलाम ये अश्के अज़ा ज़ुहैर
था मुख्तसर लहद में बड़े काम आ गया

Badi Bekali Hai Musibat Ke Din Hain

बड़ी बे कली है मुसीबत के दिन हैं
ए लोगों ये ज़ेहरा की रुखसत के दिन हैं

ज़माने ने ज़ेहरा को क्या दे के भेजा
हर एक कलमा गो पे ये इबरत के दिन हैं

जला दर गिराया क्या ये बात कम है
क्या इकलौती बेटी पे राहत के दिन हैं

खदीजा की लख्ते जिगर जा रही है
अली से ये ज़ेहरा की रुखसत के दिन हैं

जो खूं रोती आखों का कर ले तसव्वुर
तो हर दिल कहेगा क़यामत के दिन है

ज़ुहैर अपने आंसू ये रुकने ना देना
ये आले पयम्बर पे आफत के दिन हैं

Shaan Hai Besheer Main Sab Haider-e-Karrar Ki

क्या ज़रूरत हो भला बेशीर की हथियार की
ज़ालिमों पर छाई है हैबत लबों के वार की

दो लबों से ही महाज़े जंग को सर कर लिया
शान है बेशीर में सब हैदर ए कर्रार की

मुस्कराहट ने अली असग़र की साबित कर दिया
हैसियत कुछ भी नहीं है हुरमुला के वार की

बच्चा बच्चा कर रहा है ज़िक्रे हैदर देखिये
ये ज़मानत है ज़बान-ए-मीसम-ए-तम्मार की

सुनके हैदर के फ़ज़ाइल तिलमिलाना देखिये
बुघ़्ज़-ए-हैदर ने ही जिनकी ज़िन्दगी दुश्वार की

मर के हर एक मुनकिर ए हैदर को ये अफ़सोस है
बुग़ज़े हैदर में गुज़ारी ज़िन्दगी बेकार की

मर्ग पर मेरे खुली रह जाएँ तो मत ढाँपना
मुन्तज़िर हैं ये निगाहें आखरी सरकार की

मदह ख्वानी शह का मातम, जज़्बा ए नुसरत ज़ुहैर
शीर ए मादर ने हर एक खूबी मेरी बेदार की

Salwat-o-Salam Aap Pe Ya Fatima Zehra s.a.

सलवातो सलाम आप पे या फातिमा ज़ेहरा
कोहराम है मजलिस में बपा फातिमा ज़ेहरा
हम आये हैं रोने के लियें फातिमा ज़ेहरा

आते थे फ़रिश्ते जहाँ क़ुरआन को लेकर
उस घर को जलाया गया या फातिमा ज़ेहरा
कोहराम है मजलिस में बपा फातिमा ज़ेहरा
हम आये हैं रोने के लियें फातिमा ज़ेहरा

कलमा भी पढ़ा बुग़ज़ों हसद पाल के सब ने
क्या अज्रे रिसालत में दिया फातिमा ज़ेहरा
कोहराम है मजलिस में बपा फातिमा ज़ेहरा
हम आये हैं रोने के लियें फातिमा ज़ेहरा

रोने ना दिया आपको बाबा की लहद पर
उम्मत ने हर एक ज़ुल्म किया फातिमा ज़ेहरा
कोहराम है मजलिस में बपा फातिमा ज़ेहरा
हम आये हैं रोने के लियें फातिमा ज़ेहरा

दरवाज़ा जला क़त्ल हुए बे खता मोहसिन
पहलू भी शकिस्ता हुआ या फातिमा ज़ेहरा
कोहराम है मजलिस में बपा फातिमा ज़ेहरा
हम आये हैं रोने के लियें फातिमा ज़ेहरा

जब मौला को लोगों से छुड़ाने लगी बीबी
बाज़ू पा तेरे वार हुआ फातिमा ज़ेहरा
कोहराम है मजलिस में बपा फातिमा ज़ेहरा
हम आये हैं रोने के लियें फातिमा ज़ेहरा

ए काश मुसीबत को ज़ुहैर आपकी बीबी
नौहा लिखे कर पाए अदा फातिमा ज़ेहरा
कोहराम है मजलिस में बपा फातिमा ज़ेहरा
हम आये हैं रोने के लियें फातिमा ज़ेहरा

Ye Aabid Ka Sehra Duaen Bashan Ki (For Ayat)

करम पंजतन का अता पंजतन की
है आबिद का सेहरा दुआएं बशन की

दुआओं में नानी की सेहरा सुनाया
यूँ आयत के मामू ने इसको सजाया
है आबिद का सेहरा दुआएं बशन की
करम पंजतन का अता पंजतन की

था इसरार आयत का सेहरा सजा दो
ज़रा आलिया साथ में अब सुना दो
जो सेहरे में मामू ने की बात मन की
है आबिद का सेहरा दुआएं बशन की
करम पंजतन का अता पंजतन की

बने बन के दूल्हा जो आबिद चले हैं
रिदा को ये दुल्हन बनाने चले हैं
सभी दे रहे हैं दुआ अपने मन की
है आबिद का सेहरा दुआएं बशन की
करम पंजतन का अता पंजतन की

चले बनके समधी जो आरिफ तो बोले
कोई रेशमा की नज़र तो उतारे
बहु आ रही है हमारी दुल्हन की
है आबिद का सेहरा दुआएं बशन की
करम पंजतन का अता पंजतन की

है साले की शादी या बारिश के ओले
ससुर जी से अपने ये हमराज़ बोले
इधर आओ अंकल करो बात धन की
है आबिद का सेहरा दुआएं बशन की
करम पंजतन का अता पंजतन की

सजा सर पे सेहरा तो कुलसूम बोली
मेरे भाई तुमको मुबारक हो शादी
हैं बातों में ज़ाहिर ये खुशियां बहन की
है आबिद का सेहरा दुआएं बशन की
करम पंजतन का अता पंजतन की

चले बन के दूल्हा जो आबिद ये देखो
फरह ताज मेहदी की खुशियां ना पूछो
ख़ुशी इनको कितनी है तेरे लगन की
है आबिद का सेहरा दुआएं बशन की
करम पंजतन का अता पंजतन की

चचा ताए अब सब बराती बने हैं
चची ताइयों के भी चेहरे खिले हैं
चमक और ज़्यादा बढ़ी है नयन की
है आबिद का सेहरा दुआएं बशन की
करम पंजतन का अता पंजतन की

बनी तेरी समधन लो नजमी भी आई
और इक़बाल देते हैं तुमको बधाई
मुबारक हो तुमको घडी इस मिलन की
है आबिद का सेहरा दुआएं बशन की
करम पंजतन का अता पंजतन की

लो ज़ेहरा खतीजा भी सज धज के आई
तो बेटों ने भी इनके रौनक लगाई
सजी सारा देखो नवाज़िश किरन की
है आबिद का सेहरा दुआएं बशन की
करम पंजतन का अता पंजतन की

बतूल और मरियम भी सज धज के आई
अली और असग़र ने रौनक बढ़ाई
लो सज्जाद महके हैं अफ्शां जो खन की
है आबिद का सेहरा दुआएं बशन की
करम पंजतन का अता पंजतन की

ये इमरान रिज़वान और सारे बच्चे
सितारों से भी आज लगते हैं अच्छे
है आँगन में आरिफ के रौनक गगन की
है आबिद का सेहरा दुआएं बशन की
करम पंजतन का अता पंजतन की

Khadi Ho Kandhe Se Kandha Milaye Zainab Se

बक़ाए मक़सद ए शब्बीर में रहीं शामिल
तुम्हारे लफ्ज़ भी आगे ना आए ज़ैनब से

फ़ज़ीलतों में फ़ज़ीलत जुदा ये है कुलसूम
खड़ी हो काँधे से काँधा मिलाए ज़ैनब से

Jafar Hai Naam Aapko Sadiq Laqb Mila

हर जशने सादिक़ ऐन में ये भी अजब मिला
जो शख्स भी मिला वो हमें बा अदब मिला

उल्फत खुदा की दीन भी दुनिया का इल्म भी
बाक़िर के लाल आपके दर से ये सब मिला

इल्मो अमल में आप का सानी कोई नहीं
जाफर है नाम आपको सादिक़ लक़ब मिला

इस दर पे मांगने की ज़रूरत नहीं पड़ी
जो आ गया यहाँ पे उसे बे तलब मिला

मुनकिर जो इनके दर का मिले उस से पूछना
कितना मिला कहाँ से मिला और कब मिला

मिदहत ज़ुहैर इनकी बराए सवाब कर
सदक़ा है इनके दर का तुम्हें खुश लक़ब मिला