Hamara Sar to Na kal jhuka tha na ab jhukega sitam ke aage

हमारा सर तो ना कल झुका था ना अब झुकेगा सितम के आगे
ये राहे हक़ में है कट तो सकता ना अब झुकेगा सितम के आगे

इरान आया है जंग करने वक़ारो हक़ की लड़ाई लड़ने
जो अज़्म लाया हो मुर्तज़ा का वो क्या डरेगा सितम के आगे

सितम की औक़ात देखे दुनिया हमारा अज़्मों शऊर देखे
हमारी हिम्मत हमारा जज़्बा ना अब हिलेगा सितम के आगे

हर एक मुल्के अज़ीम सुन ले जो सर छुपाये हुए पढ़ा है
उठेगा नेज़ों पे सर हमारा ना अब झुकेगा सितम के आगे

हमारी मिटटी हमारा पानी हमारी खेती हो फल हमारा
ये ही तो कहना है बस हमारा जो ना टलेगा सितम के आगे

जो जान जाएगी ग़म नहीं है मगर यज़ीदे जहान सुन लें
अलम उठा है जो कर्बला का ये ना झुकेगा सितम के आगे

दिफ़ाई हमलों से काम लेता हैं फिर भी देखो है ज़ख्म कैसे
है खामनाइ शहे हुदा का डटा रहेगा सितम के आगे

जो हम पे गुज़रे थे रंज सारे वो ख़ुद पे गुज़रें तो लोग समझें
जो है जलाली ये रंग हमारा ना होगा फीका सितम के आगे

हर एक मुल्के अज़ीम सुन ले जो सर छुपाये हुए पढ़ा है
उठेगा नेज़ों पे सर हमारा ना अब झुकेगा सितम के आगे

हमारी मिटटी हमारा पानी हमारी खेती हो फल हमारा
ये ही तो कहना है बस हमारा जो ना टलेगा सितम के आगे

हवा की ज़िद पर दिया जला है जो ज़ालिमों को दिखा रहा है
लहू है इसमें भी कर्बला का ना बुझ सकेगा सितम के आगे

Ali Maula Ali Maula Ali Maula Ali Maula

अली मौला अली मौला अली मौला अली मौला
ग़दीरे खुम का सरमाया अली मौला अली मौला

पलट आएं जो आगे हैं जो पीछे हैं वो आ जाएँ
सवारी पर जो बैठे हैं ज़रा नीचे उतर आएँ
बने मिम्बर कजावो का अली मौला अली मौला
अली मौला अली मौला अली मौला अली मौला

करो तो याद वो प्यारे नबी का आखरी हज था
सुलगती रेत नीचे थी सवा नेज़े पे सूरज था
बताया फिर नबी ने था अली मौला अली मौला
अली मौला अली मौला अली मौला अली मौला

कहा जिब्रील ने आकर खुदा का हुक्म है इस दम
नबी सब से वो ही कह दें के जो पहुँचा चुके हैं हम
नबी ने कह दिया सबका अली मौला अली मौला
अली मौला अली मौला अली मौला अली मौला

रुकाया हाजियों को जब नबी ने खुम के मैदां में
सुना फिर आखरी खुत्बा सभी ने खुम के मैदां में
सरे मिम्बर था ये नारा अली मौला अली मौला
अली मौला अली मौला अली मौला अली मौला

ख़ुशी से बुज़ारो सलमान और क़म्बर जो झूमे थे
कहा था शेख ने बख्खिन अली के हाथ चूमे थे
मगर चेहरा था मुरझाया अली मौला अली मौला
अली मौला अली मौला अली मौला अली मौला

खुदा का क़हर भी आया किसी के वास्ते खुम में
था मुनकिर जो विलायत का उसी के वास्ते खुम में
गिरा पत्थर तो ये बोला अली मौला अली मौला
अली मौला अली मौला अली मौला अली मौला

Ghadeer-e-Khum Sajaya Hai Nabi Ne

ग़दीरे खुम सजाया है नबी ने
नया मिम्बर मंगाया है नबी ने

जो आगे थे उन्हें पीछे बुलाकर
हर एक हाजी रुकाया है नबी ने

बना मिम्बर कजावो का तो उसपर
वसी अपना बुलाया है नबी ने

है मिम्बर पर नबी हाथों पा हैदर
बहुत ऊँचा उठाया है नबी ने

अली मौला हैं सबके ये बता कर
बुलंदी से दिखाया है नबी ने

जो मुनकिर थे विलायत के वो बोले
हमारा दिल दुखाया है नबी ने

गिरा पत्थर जो हारिस पर ये कहकर
पयामे हक़ सुनाया है नबी ने

अली को हम वली कैसे ना माने
हमे कलमा सिखाया है नबी ने

कहाँ रोना है हसना है कहाँ पर
हर एक लम्हा बताया है नबी ने

ग़दीरे खुम ज़ुहैर अपनी ज़बां में
सुनाने को बुलाया है नबी ने

Nabi Ke Bagh Ka Gul Pehla Mehka Hai Zamane Main

कमी कुछ है अभी बाक़ी उन्हें दिल से बुलाने में
नहीं है देर कुछ भी आखरी हैदर के आने में

हमे तो पाँच बारह और बहत्तर देके भेजा है
तुम्हारे पास भी कोई सहारा है ज़माने में

नबी आये ज़मीं पर फिर अली ओ फातिमा ज़हरा
वसीला तो खुदा ने भी लिया खुदको दिखाने में

जो अब्तर कह रहे थे खुद ही अब्तर हो गए जब से
नबी के बाग़ का गुल पहला महका है ज़माने में

बराबर कैसे कहते हो अली को और तीनो से
फ़ज़ीलत जंग लड़ने में है या फिर भाग जाने में

न जाने क्यों मुसलमानों को ये इक़रार भारी है
रज़ि अल्लाह थे शामिल दरे ज़ेहरा जलाने में

Noke Qalam Se Kaam Liya Hai Husaam Ka

इसमें निहा है लुत्फ़ खुदा के कलाम का
है ज़िक्र जो लबो पे इमाम ए अनाम का

क्यों ना हसन के हुस्न पा यूसुफ निसार हों
दुनिया में सारा हुस्न है इनके ही नाम का

मौला हसन की आमदे पुरनूर के लिए
जश्ने विला सजा है बड़ी धूम धाम का

पहले इमाम बाद में क़ुरआन आएगा
क्या खूब सिलसिला है ये माहे सियाम का

मोजिज़ नुमा की सुल्ह भी मोजिज़ नुमा हुई
नोके क़लम से काम लिया है हुसाम का

सर तक उतर गया पा ना तन को खबर हुई
कितना करीम वार था सुल्हे इमाम का

मंसूबे सब उलट दिया सिब्ते रसूल ने
जीना हराम कर दिया नस्ले हराम का

जबसे ज़ुहैर तुमने सुनाई है मन्क़बत
चेहरा खिला हुआ है हर एक खासो आम का

Hai Jashn e Wiladat Imam e Hasan a.s. Ka

ये आमद का चर्चा है किस गुल बदन का
जो गुलज़ार महका रसूले ज़मन का

वो शबनम की बूंदों का कलियों से कहना
के चिड़ियें सुनाती हैं किस का तराना
है फखरे जिना आज मौसम चमन का
ये आमद का चर्चा है किस गुल बदन का

ये गुल जो खिला तो नबी मुस्कुराए
फरिश्तों ने आकर क़सीदे सुनाए
क्यों अब्तर सा चेहरा है शेख ए ज़मन का
जो गुलज़ार महका रसूले ज़मन का

हर एक सिम्त है ग़ुल जो सल्ले अला का
ये गुलशन में जलसा जो है बुल बलों का
है जश्न ए विलादत इमाम ए हसन का
जो गुलज़ार महका रसूले ज़मन का

इमाम ए हसन की जो आमद हुई है
फ़िज़ाओं में कौसर की खुशबू घुली है
हसीं है नज़ारा ही धरती गगन का
जो गुलज़ार महका रसूले ज़मन का

मिली नौकरी है दरे सय्यदा की
लबो पर सना है मेरे मुज्तबा की
लो देखो मुक़द्दर मेरे फ़िक्रों फन का
जो गुलज़ार महका रसूले ज़मन का

वो मोमिन कहाँ गर कोई हो शराबी
सहाबी का क़ातिल हो वो भी सहाबी
ये मेयार हो जिसके चालो चलन का
है दुश्मन वो ही तो इमाम ए हसन का

लो दावा मोहब्बत का प्यारे नबी से
मगर दिल से दुश्मन भी मौला अली के
है सूरत भी काली सिला काले मन का
है दुश्मन वो ही तो इमाम ए हसन का

है अज्रे रिसालत क़सीदा तुम्हारा
ज़ुहैर इसने उन सब का चेहरा उतारा
जो मुनकिर हुआ है दर ए पंज ए तन का
है दुश्मन वो ही तो इमाम ए हसन का

Zikr e Haider ko aam karte hain

हम जो ज़िक्रे इमाम करते हैं
क़द से ऊँचा ये काम करते हैं

ज़िकरे मौला का फैज़ तो देखो
सिन रसीदा सलाम करते हैं

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क़द से ऊँचा वो काम करते हैं
जो भी ज़िक्रे इमाम करते हैं

उनका सब एहतिराम करते हैं
जो सिना से कलाम करते हैं

दार पर जा के मीसमे तम्मार
ज़िक्रे हैदर को आम करते हैं

आने वाले हैं ग़ैब से मौला
क्या कोई इंतज़ाम करते हैं

मर्सिया नोहा मन्क़बत खानी
आम शह का पयाम करते हैं

नारा हैदर का हम लगा के ज़ुहैर
रुख़ पे मुनकिर के शाम करते हैं

Phool Masle Ja Rahe Hain Baghban Parde Main Hai

ना ज़मीं परदे में है ना आसमां परदे में है
फिर भी क्यों लगता है जैसे के जहाँ परदे में है

या इलाही ग़ैब की मुद्दत को अब तो ख़त्म कर
फूल मसले जा रहे हैं बाग़बां परदे में है

किस क़दर बख़शे हैं रब ने देखिए अपने सिफ़ात
आशिकों से रु बा रु भी और निहां परदे में है

उगता सूरज रोज़ देता है मिसाल इनकी हमें
नूर है फैला जहाँ में जिस्मों जां परदे में है

साज़िशों में घिर ना जाये मातमी बच्चे कहीं
ज़हर सुलगा है फ़िज़ा में और धुआं परदे में है

क्या कहें किस से कहें कैसे कहें हद पार है
जिसको रहना चाहिए अब वो कहाँ परदे में है

अब जो मिदहत है तो बस शोरो गुलूकारी से है
शायरी तो आज कल सारी मियां परदे में है

जो अता मुझको हुआ वो लिख दिया मैंने ज़ुहैर
है हकीकत सामने वहमों गुमां परदे में है

Waris e Haider e Karrar Hai Aane Wala

मूनिसो रहबरों ग़म खार है आने वाला
हम ग़रीबों का मददगार है आने वाला

जिसको अल्लाह ने ग़ैबत में छुपा रख्खा है
दीने हक़ का वो तरफदार है आने वाला

शक्लो सूरत में शबाहत में नबी जैसा है
वारिसे हैदर ए कर्रार है आने वाला

वो जो आयेगें तो इस दिल को क़रार आएगा
कलबो जां जाने दिले ज़ार है आने वाला

ज़ुल्म की नींद उड़ा रख्खी है जिसने अब तक
चौदा सदियों का वो इनकार है आने वाला

क़ब्र में सो रहा हर ज़ुल्म का बानी सुन ले
लेके हैदर की वो तलवार है आने वाला

मैंने महफ़िल में सुनाई जो ज़ुहैर उनकी सना
खुद ही कहने लगे अशआर है आने वाला

लेगा हर दौर के ज़ालिम सो वो ही आके खबर
कह दो तीनो से ये एक बार है आने वाला

Khwab Main Haidare Karrar Nazar Aate hain

इश्क़े हैदर से जो सरशार नज़र आते हैं
बस वो ही साहिबे किरदार नज़र आते हैं

सुनने आते हैं फ़ज़ाइल जो मेरे मौला के
खुल्द के सब ही खरीदार नज़र आते हैं

सीखे क़ुरआन से मिदहत का सलीक़ा दुनिया
जिसके हर लफ्ज़ में अशआर नज़र आते हैं

सुनके मौला के फ़ज़ाइल जो नहीं बोलते हैं
ग़ासिबे हक़ के तरफ़दार नज़र आते हैं

जशने मौला में ज़रा वक़्त से आया भी करें
वक़्त के जो भी गिरफ्तार नज़र आते हैं

है ये ही ज़िक्र फ़क़त जिसने सवारा है हमें
वरना हर कोम में फनकार नज़र आते हैं

खुश नसीबी है हमे फ़र्शे मसर्रत पे ज़ुहैर
जितने चेहरे हैं वो गुलज़ार नज़र आते हैं